Description
“एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा” — पिछले दिनों यह slogan Delhi के women-safety protests से निकलकर Instagram, Reels और social media पर खूब viral हुआ। इसके जवाब में “एक इडली, दो डोसा… हर मर्द नहीं एक जैसा” जैसे slogans भी सामने आए। TV9 भारतवर्ष
लेकिन इस viral trend के बीच एक सवाल हम पुरुषों और महिलाओं—दोनों से पूछ सकते हैं:
क्या हर मर्द एक जैसा होता है?
एक लड़की के जीवन में—
पापा उसकी राजकुमारी कहते हैं,
भाई उसकी पक्की यारी होता है,
पति उसके लिए पूरी दुनिया लुटा सकता है,
और फिर भी समाज में “मर्दों का क्या भरोसा” जैसा एक collective statement सामने आता है।
महिलाओं की safety, dignity और freedom के सवाल बिल्कुल वास्तविक और गंभीर हैं।
लेकिन क्या इसका जवाब हर पुरुष को एक ही नजर से देखना है?
शायद हमें पुरुष और महिला की लड़ाई नहीं,
अच्छे और गलत व्यवहार के बीच की लड़ाई लड़नी चाहिए।
क्योंकि—
गलत आदमी की पहचान उसके gender से नहीं, उसके behaviour से होनी चाहिए।
और अच्छे पुरुषों को भी यह समझना होगा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है।
हर मर्द एक जैसा नहीं होता।
और हर औरत को सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है।
